कुछ शांत पलों की पंकितयां। मेरी ओर से 

भूल के गमोंं को आगे बढ़ना है चल
ज़मीन से उठकर आकाश को चूना है चल
मुश्किलें तो दुनिया की सच्चाई है मेरे दोस्त
रात के अंधेरों को छोड़ उजाले साथ लेकर चल

ज़िन्दगी सुहाना है सफर , मिलती है एक बार
रोना है या हसना है , करना है ये ऐतबार
उम्मीदों की ऊँगली थम , निकल चले इस सफर में
राहों की फैली चाद्दर को महसूस करते चल

प्यार रूह है ज़िन्दगी की , जोड़ें हम,हमें खुदी से
एक जलती लॉ है, जो जले तन में हर पल
एक अपना हो हमेशा साथ , कल आज और कल
इस उगते सूरज के संग , ढूंढने निकले उस मंज़िल को चल…holidays-32a

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