खुद से मिल आउ कभी

बरसों से ख्वाइश है, खुद से मिल आऊ कभी दुनिया की तो सुनती ही रहती हूं दौड़ के चल दूं दिल की ओर वह आवाज़ लगाये तभी आशा की निगाहों से ढूंढती हूं मंज़िल को क्या पता उससे पूंछू तो वह ही बता दे उन्हें पाने के रास्ते सभी चाहता है हमेशा से कुछ कहना... Continue Reading →

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