एक अनोखी शाम …..

उस सुनहरी शाम में ढलते सूरज के लालिमा से ढकी चढ़ते हुए चाँद की चांदनी में सजी एक अनोखी मदहोशी सी छा रही थी हर शाम तारों से सजी समूचे आकाश में तन के फैलती हुई रात्रि अपने आँचल की सिकुड़ती हुई रंगीनियों को देखकर बरबस चरमरा रही थी ढोल बाजे की धुन पर नाचते... Continue Reading →

याद हैं न?

वो दो लफ़्ज़ों की बातें, वो दो किस्सों की रातें वो दो पलों की मुलाकातें याद हैं न?   वो दो तारे जगमगाते वो दो जाम छलकाते वो दो गाने गुनगुनाते हम याद हैं न?   वो दो पलों का श्रृंगार, वो दो पलों का दीदार दीवार की ओट से झांकना उन्ही दो लम्हो में... Continue Reading →

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